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Friday, 21 February 2014
himachal ki shaan Birbal sharma mandi
Himachal ki shan himsanskriti magazine
फोटो गैलरी
BIRBAL SHARMA
BIRBAL SHARMA-15 अगस्त, 1972 को कैमरा थामकर मैदान में उतरने वाले 16 साल के बीरबल शर्मा में बेशक जुनून बेशुमार था, लेकिन उस वक्त शायद उन्होंने भी कल्पना नहीं की थी कि वह लैंस के जरिए समूचे हिमाचल को फ्रेम में उतार लेंगे। खून जमाती ठंडी हवाओं और तन-बदन भिगोती बारिशों के बीच भी उनके शौक की चिंगारी मद्धिम नहीं होने पाई और एक-एक शॉट कैमरे में कैद करने के लिए उन्होंने मीलों पैदल सफर किया। यह वह दौर था जब हिमाचल प्रदेश में सड़कें विरल थीं और आवागमन के साधन भी बहुत कम, लेकिन फोटोग्राफी के शौक ने बीरबल शर्मा को छलनी पैरों का दर्द जैसे महसूस ही नहीं होने दिया। बड़सर के एक स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ते वक्त खींचे गए ग्रुप फोटो को बीरबल शर्मा हासिल नहीं कर पाए, क्योंकि परिवार महज एक छायाचित्र के लिए साढ़े तीन रुपए चुकाने की हैसियत नहीं रखता था। बचपन का यह मुफलिसाना एहसास उन्होंने सीने में हमेशा जिंदा रखा और होश संभालते ही कैमरा उनका हर वक्त का साथी बन गया। वर्ष 1972 के बाद बीरबल शर्मा 50 हजार से अधिक लाजवाब चित्र खींच चुके हैं। इन बेशकीमती मुंह बोलते चित्रों में हजारों अनजान लोगों के चेहरे जीवंत हैं, पर इसे क्या कहें कि इस यायावर के पास ऐसा एक भी फोटोग्राफ नहीं, जिसे देखकर बचपन की याद ताजा की जा सके। बहरहाल, गनीमत यह रही कि बीरबल शर्मा ने अपने अनमोल खजाने को खुद तक ही सीमित न रखते हुए देश-दुनिया के लिए इसके दरवाजे खोल डाले। अपने चित्रों को दुनिया के सामने लाने के लिए उन्होंने निरंतर कठिन श्रम किया, जिसका प्रतिफल हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी के रूप में आज सबके सामने है। चंडीगढ़-कुल्लू हाई-वे पर मंडी से चार किलोमीटर दूर बिंदराबणी में स्थित यह स्थल बीरबल शर्मा की दशकों लंबी हिमाचल साधना का प्रतिफल है। यहां पहुंचकर प्रदेश के हर पहलू से एकाकार होने का अहसास देखने वालों की आंखों में साफ झलकता है और आंखों की यह चमक सलाम करती है उस शख्स को, जिसने अपनी आधी जिंदगी इस अनूठे शौक के नाम कर दी।
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